Monday, January 21, 2019

亚投行交通战略:科学家有话说

不少中外对话的读者都知道,由中国牵头成立的亚洲基础设施投资银行计划在全球半数的地区推动交通、能源和其他项目的投资。

最近,我主持了一个针对亚投行( )交通项目融资与推广愿景的评价项目。评价小组由34位环境科学、地理学、经济和发展领域的顶尖专家组成,他们来自16个发达国家和发展中国家,代表了包括中国在内的全球各主要地区。

愿景大,影响也大

我们对亚投行草案计划(即亚投行对大型公路、铁路、港口等项目,及其衍生项目的融资和启动规划)的看法可以归结为一句话:先开枪,后瞄准

让我们感到警觉的不仅是计划草案中的内容,还有那些我们没有看到的内容。这里,我们将强调几个关键的问题——需要指出的是,这些都只是触及了问题的表面。

在继续讨论之前,关于亚投行我们应该牢记三件事。首先,亚投行是一个国际多边银行,理论上来说它应该为更广泛的利益而努力,而不只是推动中国实现地缘与经济目标的工具。尽管目前亚投行已经拥有80多个成员国合作伙伴,但是显然中国才是真正的“大股东”。而中国一直倾向于推进那些于自身有益的事项。

其次,亚投行针对的不仅是亚洲地区,它还为中国的“一带一路”倡议提供支持。“一带一路”倡议下7000多个独立的基础设施和采掘项目跨越南太平洋,遍及东南亚、中南半岛、东亚、中亚、中东、欧洲和非洲大片地区。

最后,亚投行希望成为一个变局者,通过吸引更多其他政府和社会投资者、消除阻碍、推动那些能够带来“变革”、深化发展的项目来为基础设施建设增压助力。

潘多拉的盒子

我们关心的一个问题也得到了尼日利亚国家溢油监测与响应机构穆罕默德·穆罕默德博士的认同。

他指出:“交通领域最危险的问题被亚投行忽视了,比如新建道路和交通项目经常使一些偏远的荒野地区对大量无规划、无控制的活动敞开大门。”

过去近四十年的时间里,我一直致力于研究亚太、非洲和拉丁美洲地区基础设施建设发展对环境、社会和经济的影响。因此,我非常赞同穆罕默德博士的看法。

从很多偏远的亚投行项目所在地明显可以看出,基础设施扩张造成的最大的影响就是仿佛打开了一个环境压力的潘多拉魔盒,森林砍伐、栖息地碎片化、火灾、野生动植物偷猎、非法采矿与土地掠夺等都将借助这些基础设施得以进入。

这个问题是交通基础设施建设的核心问题,且不说没有明确相关的管理和减缓措施,完全没有提及这个风险就足够引起人们的警觉了。

缺位的战略规划

此外,针对亚投行在推进交通项目建设之前没有要求进行战略性区域研究这一问题,我们的研究人员也深表担忧。

孟加拉国吉大港大学穆罕默德·阿拉姆吉尔博士表示:“这就像是蒙着眼睛做一场大手术。大型基础设施项目的财政、环境和社会风险比多数人想象的都要大得多,这也就是为什么战略评估至关重要的原因。”

现有的自然环境日趋碎片化,其中还夹杂着各种生物多样性热点地区、稀有生态系统、重要的野生动物迁徙通道和濒危物种所剩无几的栖息地。

世界自然基金会香港办公室表示,仅“一带一路”倡议就会影响包括濒临灭绝的老虎、大熊猫和赛加羚羊在内的数以百计的濒危物种和地球上许多生物多样性最丰富的地区,包括1800多个重要的鸟类栖息区、生物多样性关键地区、全球生物多样性热点地区和全球200个关键生态区。

这样看来,亚投行和“一带一路”倡议实际上是在用数以千计的交通、能源、水资源等基础设施项目“切开”地球,但却忽视了为避免灾难性后果而必须采取的一项措施——战略规划。

致命的速度

亚投行一直宣称自己是一个“精干、清洁和绿色”的国际机构,但是我们中的很多人都还没有被说服,尤其是“清洁和绿色”这个部分。

从一开始,亚投行就强调要提高效率、精简团队,从表面上看是为了加快项目评估和审批。但是这种做法却引发了很多担忧。正如我在2016年指出的那样,亚投行的这种快速模式实际上迫使世界银行为了保持竞争力,不得不简化自己的环境和社会评估流程。

正如本次评估报告的另一位作者、曾任世界银行和3位美国总统环境顾问的美国乔治梅森大学托马斯·拉夫乔伊教授所说的那样,这并不是什么好消息。

拉夫乔伊先生表示:“一味强调快速决策意味着一些重大风险,如长期的环境与社会问题等会被忽视。”

当我们看到“快速评估”这个词时,我们想到的就是快速得出结果。但是速度快就很难保证有效监管,也就无法发现困扰很多基础设施项目建设的腐败问题。

一味强调速度也会导致我们很难发现一些环境、社会和政治风险,其中很多风险并不那么简单和清楚明了。除此之外,快速还会加大投资者的风险,增加项目延期或者失败的风险,导致公共资金浪费、资产搁置,并可能为项目所在国增加不少国际外债。

其实,目前我们已经对交通项目风险进行了大量研究,并且发布了不少研究成果。在阅读了亚投行的规划后我们还是发现了一些需要引起注意的问题。不仅我们这样看,不少海外的中国商人也对这些中国牵头的项目持有相同的看法。

总结

面对我们的批评,亚投行常常会引用其环境与社会框架的内容,实质上等于在说:“别担心,相信我们。”但是我们认为,这个框架过于模糊,也没有什么说服力。作为科学家,我们已经见识了全球不少基础设施建设带来的灾难,所以恐怕无法接受表面的许诺

虽然亚投行早期的行事风格还比较谨慎, 但正如其“运输部门战略草案”所阐明的那样,亚投行有着远大的抱负——它要在基础设施扩张这个世界上风险最大的游戏中成为变局者。 然而我们认为,如果不能从根本上重新考虑其战略,亚投行未来必将面临重大的风险和强大的阻力。

Wednesday, December 12, 2018

जाति और मज़हब की भूमिका

आईजीआईडीआर (इन्कम जेनरेशन एंड इनइक्वालिटी इन इंडियाज़ एग्रिकल्चर सेक्टर) के 2016 के रिसर्च पेपर के अनुसार 2003 से 2013 के बीच किसानों की आय में 75 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.
मध्य प्रदेश के किसानों के परिवारों की प्रति व्यक्ति आय 2013 में 1,321 रुपए हो गई, लेकिन इसके बावजूद यह भारतीयों की औसत आय से सात फ़ीसदी कम है.
इसकी सबसे मुख्य वजह ग्रामीण आमदनी का कम होना है. यह इसलिए अहम है क्योंकि मध्य प्रदेश के 76 फ़ीसदी किसानों के पास बहुत छोटी जोत है और ये ग्रामीण मज़दूरी पर निर्भर हैं.
हालांकि इन सालों में मध्य प्रदेश औद्योगिक सेक्टर में कुछ नहीं कर पाया. 2003 में भारत के औद्योगिक उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 3.6 फ़ीसदी था जो 2014 में 3.2 फ़ीसदी हो गया.
मानव विकास सूचकांक के मामले में भी मध्य प्रदेश की स्थिति ठीक नहीं है. मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 1000 में 47 है पर राष्ट्रीय स्तर से (34) ज़्यादा ही है. शिक्षा के मामले में भी मध्य प्रदेश की हालत ठीक नहीं है.
एएसइआर के सर्वे के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों के सरकारी स्कूलों में 17 फ़ीसदी बच्चे बुनियादी अक्षरों को भी नहीं पहचान पाते हैं जबकि 14 फ़ीसदी बच्चों को बुनियादी अंकगणित का ज्ञान नहीं है. यह तस्वीर राष्ट्रीय स्तर से ज़्यादा चिंताजनक है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 15 फ़ीसदी और 12 फ़ीसदी है.
मध्य प्रदेश में बेरोज़गारी की समस्या भी विकराल है. इस साल के आर्थिक सर्वे के मुताबिक़ 2016 के अंत तक मध्य प्रदेश में 10.12 लाख रजिस्टर्ड शिक्षित बेरोज़गार हैं और इनमें से 422 लोगों को ही 2017 में रोज़गार मिला.
भारत में चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं होते. जाति और मज़हब की चुनावों में अहम भूमिका होती है और यह चुनाव भी कोई अलग नहीं है.
बीजेपी को जीत दिलाने में आदिवासी और पिछड़ी जाति के वोटों की अहम भूमिका रही है. शिवराज सिंह चौहान ख़ुद किरार जाति के हैं जो मध्य प्रदेश में ओबीसी श्रेणी में आती है. बीजेपी ने पहली बार किसी पिछड़ी जाति के व्यक्ति को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया. आठ दिसंबर, 2003 से पहले बीजेपी के सारे मुख्यमंत्री सवर्ण बने थे. ज़ाहिर है बीजेपी को इसका फ़ायदा भी मिला.
शिवराज सिंह चौहान की सरकार कई लोकप्रिय योजनाओं के लिए भी जानी जाती हैं. यह सरकार लड़कियों के जन्म पर एक लाख रुपए का चेक देती है जिससे 18 साल की उम्र में पैसे मिलते हैं. ग़रीबों के घरों में किसी की मौत पर पांच हज़ार रुपए अंत्येष्टि के लिए देती है. सरकार सामूहिक शादियां कराती हैं और ख़र्च भी ख़ुद ही उठाती है. आदिवासी और दलितों के बीच सरकार की यह योजना काफ़ी लोकप्रिय हुई है. शिवराज अपनी विनम्रता के लिए जाने जाते हैं और सत्ता से विदाई भी उन्होंने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को बधाई देते हुए ली.

Wednesday, November 28, 2018

الحبس شهرين لاربعة متهمين بتمزيق الاعلانات الانتخابية لمرشحي الشمالية

قضت المحكمة الصغري الجنائية الصغري الثالثة بحبس 4 متهمين بتمزيق الاعلانات الانتخابية للمرشحين بالمحافظة الشمالية كل منهم مدة شهرين مع وقف تنفيذ مدة ثلاث سنوات، مع تغريمهم بما مجموعه 800 دينار.
واسندت النيابة للمتهمين انهم في ليلة 3/11/2018  بدائرة امن محافظة الشمالية اتلفلو واخر حدث واخرين مجهولين عمدا الاموال المنقولة المبين الوصف بالأوراق والمملوك للمجني عليهم بأن قاموا بتمزيق الإعلانات الانتخابية المرخص بها والخاصة بسالفي الذكر على النحو المبين بالأوراق.
واعترف  المتهم الاول انه التقى بأصدقائه المتهمين الثاني والثالث والرابع واخرون وقاموا بالاتفاق على اتلاف بنرات مرشحي الانتخابات بالقرب من دوار المالكية القريب من مجمع الريف وكان ذلك بهدف تخريب الانتخابات حيث قاموا باتلاف بإيديهم من خلال الفتحات الموجوده بها ومن ثم قام المتهم الاول بالتقاط صور لما تم اتلافه وارساله لحساب على الانستغرام والذي يتابعه من ألفين إلى ثلاثة آلاف متابع وبدوره قام صاحب الحساب  بنشر الصور في برنامج الانستغرام .
وقالت المحكمة انه لما كانت الدعاية الانتخابية من بين أهم مظاهر الممارسة الديمقراطية التي كفلها المشرع للمترشحون عند مباشرتهم لحقوقهم السياسية المكفولة بموجب الدستور والقوانين ذات العلاقة ، فاذا ما توافرت كافة الضوابط المتطلبة قانوناً في الدعاية الانتخابية فلا يجوز بإي حال من الاحوال الإعتداء على تلك الحرية المقررة بموجب القوانين سواء بالتعرض لتك الدعاية الانتخابية المكفولة وفق القانون للمترشحين بتعمد اتلاف أو تمزيق إعلانات المرشحين او جعلها غير صالحة فان ذلك يعد جريمة معاقب عليها قانونا ، وان كانت البواعث الدنئية التي يكمنها مرتبكي هذه الافعال  والمتمثلة بالتدخل بحريات الناخبين والتشوويش عليهم قبل ممارستهم لحقهم السياسي للاستحقاق الانتخابي لتحقيق جميع التطلعات الشعبية بهدف التأثير سلباً على العملية الانتخابية في المملكة يمكن اعتباره بحد ذاته ظرفاً مشدداً عمالاً لنص المادة(75) من قانون العقوبات
مجددا وبإجماع الآراء.. حكمت محكمة الاستئناف العليا بتأييد الحكم بإعدام قاتل إمام مسجد بن شدة بالمحرق وصرح حسين خميس رئيس نيابة محافظة المحرق أن محكمة الاستئناف قد أصدرت حكمها في الطعن المقدم من المتهمين في قضية قتل امام مسجد بن شدة حيث قضت برفض الطعنين وبتأييد الحكم المستأنف. 
وكانت النيابة العامة قد أحالت المتهمين الاثنين في تلك القضية إلى المحاكمة بتهمة القتل العمد مع سبق الإصرار وإخفاء أدلة متعلقة بالجريمة وإخفاء الجثة وانتهاك حرمتها، وطالبت بإنزال أقصى العقوبة بالمتهمين والقضاء بإعدام المتهم الأول، فقضت المحكمة الكبرى الجنائية وبإجماع الآراء بإعدام المتهم الأول وبمعاقبة المتهم الثاني بالحبس مدة سنة والابعاد عما اسند اليه من الاشتراك مع المتهم الأول في اخفاء جثة المجني عليه وعدم ابلاغه عن الواقعة، فطعن المحكوم عليهما بالاستئناف في ذلك الحكم.
وكانت محكمة أول درجة قد أشارت إلى أنه ثبت من تقرير الطب النفسي أن المتهم لا يعاني من أي أمراض أو اعراض نفسية أو عضوية اثناء ارتكابه الواقعة وأنه مسؤول عن أفعاله مسؤولية كاملة وتنتفي كل الاعذار المخففة الموجبة لتخفيف العقوبة، وأنه عن توافر القصد الجنائي، فإن اعترافات المتهم أكدت أنه انتوى قتل المجني عليه نظرًا إلى خلافات بينهما وقام بالواقعة، الأمر الذى يكون معه القصد الجنائي متوافرا في حقه، بالإضافة إلى ظرف الإصرار لدى المتهم من خلال توافر الباعث على القتل وهو الضغينة التي اختزنها المتهم في نفسه للانتقام من المجني عليه نتيجة الخلافات السابقة.
وأضافت أن أعضاء المحكمة اجمعوا على إيقاع عقوبة الإعدام بالمتهم الأول جزاء وفاقا لما اقترفت يده ومصداقا لقول الله عز وجل: «ولكم في القصاص حياة يا أولي الالباب لعلكم تتقون»، ولذلك حكمت المحكمة على المتهم الأول بالإعدام وبمعاقبة الثاني بالحبس سنة عما أسند إليه.

Monday, November 12, 2018

ऐसी फेमस डिशेज जिन्हें आप फ्री में भी कभी नहीं खाना चाहेंगे

खाने के शौकीन आपको कहीं भी मिल जायेंगे जिन्हें कुछ खास पसंद होता है और तो और ऐसे लोग पसंदीदा खाने के लिए किसी रोक टोक को पसंद नहीं करते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे खाने भी होते हैं जिन्हें आप खाना तो दूर देखना भी पसंद न करें। लेकिन जहां लोग उन्हें खाते हैं वो बड़े चाव से खाते हैं। ये वो डिशेज हैं जिनमें खाने को सड़ा गला कर बनाया जाता है, खाने को सड़ा कर बनाने के अपने फायदे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि सड़े हुए खाने को खाने से आंतों में अच्छे बैक्ट्रिया पहुंचते हैं।बहरहाल मैं आपको उन पांच डिशेज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे अलग अलग मौकों पर पहली और आखिरी बार खाया है। तो ऐसा क्या खास है इन खानों में आप भी जानिए। पनीर से बनने वाले व्यंजन कई लोगों को बहुत पसंद होते हैं इसलिए पिज्जा, बर्गर आदि में लोग एक्स्ट्रा पनीर भी पसंद करते हैं।खासकर शाकाहारी लोगों के लिए चिकन-मटन के बदले पनीर ही ऑप्शन सबसे उत्तम माना जाता है लेकिन एक ऐसी डिश है जो पनीर को पूरी तरह सड़ा कर बनाई जाती है। उसे इस हद तक सड़ाया जाता है कि उसमें कीड़े पड़ जाते हैं और उसमें से एक तरह का लिक्विड निकलने लगता है।

इटली के सार्डिनियन इलाके में कासू मार्जु नामक पनीर का डिश मिलता है, जिसमें जिंदा कीड़े होते हैं। लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए तय यूरोपीय मानकों के अनुसार इसे बनाने की मनाही है लेकिन ये डिश भूख बढ़ाने के लिए अच्छी मानी जाती है।

इसमें मौजूद कीड़े 15 सेंटीमीटर तक उछल सकते हैं इसलिए इस पनीर को खाने वाले को इसे इस तरह से खाना पड़ता है कि ये कीड़े उछलकर आंख और नाक में न घुस जाएं।जो लोग ज़िंदा कीड़ों के साथ नहीं खा सकते वे पेपर बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस डिश को पेपर बैग में डाले और बंद कर दें।कीड़े उछलने लगेंगे और थोड़ी देर बाद ऑक्सीजन की कमी से मर जायेंगे और इसका स्वाद मरे हुए कीड़े के साथ लिया जा सकता है।
इस तरह की स्थिति तब आती है जब आप किसी ऐसे स्थान पर फंसे हो जहां किसी भी तरह का खाना न हो जैसे अगर आप आईलैंड पर फंसे हैं और आपके चारों तरफ पानी और पानी में हो ग्रीनलैंड शार्क। तब आपको लगेगा इसमें कौन सी बड़ी बात है, आप उन्हें पकड़ेंगे और खा जायेंगे।लेकिन ये इतना आसान नहीं है। इंसानों के लिए ग्रीनलैंड में पाए जाने वाले शार्क का मीट घातक होता है क्योंकि इसमें यूरिया का मात्रा अधिक होती है। लोग पहले इन्हें पकड़ते हैं, इनका सिर काट कर शरीर से अलग करते हैं और बिना सिर के शरीर को रेत में गाड़ देते हैं। जहां उन्हें गाड़ा जाता है वहां कई सारे पत्थर लगा दिए जाते हैं ताकि उसे खाने के लिए दूसरे जीव ना आ जाएं।

उसे तब तक छोड़ दिया जाता है जब तक वो सड़ न जाए। तब उसे निकालकर टुकड़ों में काटा जाता है और कुछ महीनों के लिए इसे और सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है।अंत में ये खाने के लिए तैयार है। इसमें अमोनिया की मात्रा अधिक होती है। कई लोग इसे खाते समय स्थानीय ब्रांडी को भी साथ में रखते हैं जिसे 'प्लेग' कहते हैं। खैर, मुख्य बात है दोनों को तुरंत निगलना लेकिन जिनके पास इंतजार करने का इतना समय नहीं है वे इसे आईलैंड की किसी सुपरमार्केट से सीधा खरीद सकते हैं।

Wednesday, October 10, 2018

गुजरात में हुई हिंसा और पलायन पर वहां के बिहारी क्या सोचते हैं?

गुजरात के साबरकांठा ज़िले के हिम्मतनगर में कथित रूप से हुए बलात्कार के बाद यहां से बिहार-यूपी के लोगों का पलायन जारी है.
इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. गुजरात में रहने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों पर हमले हो रहे हैं.
इस बारे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से बात की और घटना पर चिंता व्यक्त की है.
राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस मुद्दे पर कहा है कि जो भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.
28 सितंबर को हिम्मतनगर के एक गांव में 14 साल की एक बच्ची का कथित रूप से बलात्कार किया गया था. मामले में बिहार के रहने वाले एक शख़्स को गिरफ्तार किया गया था.
यूपी-बिहार के लोगों पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई में कम से कम 361 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.
साबरकांठा ज़िले के अलावा गुजरात के कई शहरों में दहशत का माहौल है.
इस मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषक हरि देसाई कहते हैं, "मैं स्पष्ट तरीके से ये मानता हूं कि यह पूरा मुद्दा राजनीतिक है. इस मुद्दे में राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो राज्य में कानून-व्यवस्था कायम रखे."
वो कहते हैं कि जिस सरकार को ये लगता है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों को भड़का रही है तो वो इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठा रही है.
हरि देसाई कहते हैं कि गुजरात ने कभी भी, किसी भी दूसरे राज्य के लोगों को अलग नहीं माना है. चुनाव आ रहे हैं और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है.
गुजरात के विभिन्न शहरों में बसे उत्तर भारतीय अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ जुड़े हैं.
हिंदी विकास मंच एक ऐसी ही संस्था है. मंच के संस्थापक जीतेंद्र राय गुजरात में दशकों से रह रहे हैं. उनका कहना है कि ये मुद्दा अब राजनीतिक हो चला है जिसके निशाने पर उत्तर भारतीय हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "देश के हिंदी भाषी राज्यों में चुनाव होने हैं और इन हमलों से शायद ये संदेश देने की कोशिश हो रही है कि गुजरात में हिंदी भाषी सुरक्षित नहीं हैं."
"गुजरात में दूसरे राज्यों के लोगों के साथ ग़लत व्यवहार कभी भी नहीं हुआ है. मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे को लेकर कोई भी इंसान ज़्यादा समय तक राजनीति कर पाएगा."
वो कहते हैं कि हर समाज में असामाजिक तत्व होते हैं. एक व्यक्ति के कारण पूरे समाज को दंडित करना न्यायोचित नहीं है.
हम सालों से गुजरात में रह रहे हैं पर इस तरह का माहौल हमने कभी नहीं देखा. अफवाहों के कारण लोगों में डर का माहौल है.
दूसरे राज्य से आए लोगों पर हमले हुए हैं, इस बात को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन उससे ख़राब परिस्थिति ये है कि वो अफवाहों के कारण घर वापस लौट रहे हैं.

Friday, September 14, 2018

南极冰川融化不断“加速”

一份研究显示,南极冰川融化速度比预计的要快。十年里,年冰川融化率增长了几乎800亿吨。
南极西部的冰川融化是最严重的,据估计2006年这里约有1320亿吨冰川融化。

南极半岛冰川融化率更高,尽管总体融化吨数降低了。

英国《泰晤士报》引据布里斯托大学教授乔纳森•班博()的话报道,“这项报道再一次证实了目前我们的世界面临的境况。”

近年来,格陵兰岛,巴塔哥尼亚的山脉冰川及阿拉斯加州都发生了类似状况。放眼望去,这种危机到处都是。
中国首都北京宣称已经达到了今年奥林匹克运动会所要求的环境指标,但是最近的一份研究对北京空气质量是否真的改善提出质疑。
这份研究报告出自一名美国环境顾问之手,发表于《国际先锋论坛报》()。研究指出,该市政府的空气质量监控系统并没有一定规则。

研究还表示,北京2006年调整了评估污染的规则。停止使用来自两个污染较严重地区监控站的数据,取而代之使用另三个污染较小地区监测站的数据。

如果没有作出这样的改变,北京2006年2007年达到国际空气质量标准的“蓝天数量”就无法达标。

北京环保局副局长杜少中对这份研究报道作出回应:“北京的空气质量已经很明显地好转……这是个不争的事实。”
三家跨国公司因为屡次被环保部门查出有污染行为周四被环保总局通报批评。事实上,跨国公司的污染问题近年来逐渐浮出水面。
欧诺法装饰材料(上 海)有限公司,上海中远川崎重工钢结构有限公司及今麦郎食品(成都)有限公司等三家公司仍然对中国的环境法律置若罔闻,数次被发现有环境违法行为。

公众与环境研究中心负责人马军证实说,在他们汇集的中国水污染地图和空气污染地图上,被环保部门点名批评过的跨国公司的数量,已经从一年前的八九十家增加到目前的近三百家。

马军认为,跨国企业在中国污染状况呈上升势头,部分原因是相当一部分跨国企业执行双重标准,在中国缺乏环境责任感。
国务院已发出通知指出,从2008年6月1日起,中国将在全国范围内禁止生产、销售、使用厚度小于0.025毫米的塑料购物袋,并将实行塑料购物袋有偿使用制度。
通知指出,“塑料购物袋是日常生活中的易耗品,我国每年都要消耗大量的塑料购物袋。塑料购物袋在为消费者提供便利的同时,由于过量使用及回收处理不到位等原因,也造成了严重的能源资源浪费和环境污染。”

“特别是超薄塑料购物袋容易破损,大多被随意丢弃,成为“白色污染”的主要来源。目前越来越多的国家和地区已经限制塑料购物袋的生产、销售、使用。”严格限制塑料购物袋的生产、销售、使用等的目的在于“落实科学发展观,建设资源节约型和环境友好型社会,从源头上采取有力措施,督促企业生产耐用、易于回收的塑料购物袋,引导、鼓励群众合理使用塑料购物袋,促进资源综合利用,保护生态环境,进一步推进节能减排工作。”
尽管核电因高耗费和危险性而遭到反对,但英国政府周四批准了新一代核电站的发展计划。
商业大臣说,新核电站的建设必须要确保未来安全和平衡的电力供给。

环保者对这一决定表示失望。地球之友的总监说,英国发展核电站的决定即是不理性的也是不幸的。

他说,“当我们需要领引(英国)走向绿色和可持续发展的领导者的时候,我们却被带回到了要使用一个不成功技术的阶段。这样的技术不仅要耗费几十亿英镑,它还将使得我们为后代留下的遗产是可造成长达几万年致命污染的放射性核废料。”报道,中国将在2009年成为全球最大的风轮机生产国。 全球风能委员会秘书长说,到2020年风能将能供应全球12%的电力需求,远高于2007年的1% 的比例。这样的转变将有助抑制全球变暖。

他期望中国的风轮机生产商的年生产能力到2009年达到100亿瓦特。
《路透社》周二报道说,肆虐南部非洲的洪灾已使得1千5百万赞比亚人逃离了家园。
报道说,暴雨使得南部非洲地区的几万人处于了危险之中。

莫桑比克的官方消息说,该国已有6人死于此次洪灾。赞比亚和津巴布韦的官方都称她们国家有伤亡,但没有具体说明情况。
《路透社》周二报道说,美国以需要更多时间来获得新的数据和公众的意见为由而推迟了决定是否全球变暖已使得北极熊成为了一濒危动物。而环保者已誓言因这一决定的延迟而起诉美国有关机构。
北极熊依赖海冰作为捕获海豹的平台。气候变化造成的海冰的消融使得北极熊不得不进入它们捕获猎物可能性低的陆地区域。全球变暖首次成为了威胁任何美国物种的一个因素。

原先确定的决定是否把北极熊列入濒危物种法案的最后期限是周三。


Monday, September 3, 2018

हैदराबाद ब्लास्टः जब दो धमाकों से दहल उठा था निजाम का शहर

हैदराबाद में रहने वाले लोग उस दिन को कभी भूला नहीं सकते. वो ऐसा दिन था, जब 42 बेगुनाह लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. एक बाद एक दो बम धमाकों ने निजाम के शहर को दहला कर रख दिया था. इन धमाकों को अंजाम देने का इल्जाम है आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन पर. आज से 11 साल पहले उस दिन क्या हुआ था. हम आपको बताने जा रहे हैं.
लुंबिनी एम्युजमेंट पार्क में धमाका
25 अगस्त 2007 की शाम थी. हमेशा की तरह हैदराबाद शहर लोगों की चहल-पहल से गुलजार था. किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ लोगों के लिए ये शाम उनकी जिंदगी की आखिरी शाम बन जाएगी. शहर का लुंबिनी अम्युजमेंट पार्क लोगों से भरा हुआ था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक 7 बजकर 45 मिनट पर वहां एक जोरदार धमाका हुआ. हर तरफ धुआं और धूल का गुबार था. धमाके बाद वहां लोगों की चीख पुकार सुनाई दे रही थी. जब धूल और धुआं हटा तो सामने कई लाशें पड़ी थी. कुछ लोग गंभीर रूप से घायल थे. लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या है. उस धमाके में वहां 10 लोगों की जान चली गई थी. पुलिस प्रशासन पार्क की तरफ दौड़ पड़ा था.
गोकुल चाट भंडार पर ब्लास्ट
आतंकियों का दूसरा निशाना था शहर का मशहूर गोकुल चाट भंडार. अक्सर लोग वहां चाट खाने के लिए जाते हैं. उस दिन यानी 25 अगस्त की शाम भी वहां काफी भीड़ थी. दुकान के आस-पास भी काफी लोग परिवार समेत जमा थे. तभी अचानक पार्क में हुए धमाके के ठीक 5 मिनट के बाद यानी 7 बजकर 50 मिनट पर गोकुल चाट भंडार पर एक जोरदार ब्लास्ट हुआ. धमाके की आवाज़ दूर तक सुनाई दी. धूल और धुएं का गुबार छंटा तो सामने मौत का मंजर था. सबसे ज्यादा लोगों की मौत वहीं हुई थी. दरअसल, वहां हुए धमाके में 30 लोग मारे गए थे. कई लोग घायल थे. दो धमाकों ने पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए थे. गोकुल चाट भंडार पार्क से 5 किमी दूरी पर था.
सर्च ऑपरेशन में मिले थे 19 बम
इन दोनों धमाकों में घायल हुए लोगों में से दो लोगों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था. इन दोनों धमाकों के बाद हैदराबाद पुलिस हरकत में आ चुकी थी. पुलिस समझ चुकी थी कि ये कोई आतंकी साजिश है. पुलिस ने फौरन शहर के सभी भीड़भाड़ वाले इलाकों को खाली कराकर तलाशी अभियान चलाया. सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को शहर के अलग-अलग इलाकों से 19 बम मिले थे, जो पुलिस ने डिफ्यूज किए थे.
इंडियन मुजाहिदीन के 4 सदस्य गिरफ्तार
पुलिस और अन्य एजेंसियां मामले की छानबीन कर रही थी. तभी हैदराबाद को धमाकों से दहलाने वाले आतंकी संगठन का खुलासा हो गया था. इन बम धमाकों को इंडियन मुजाहिदीन ने अंजाम दिया था. छानबीन और लंबी जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक जा पहुंची थी. पुलिस ने इस मामले में इंडियन मुजाहिदीन संगठन के चार सदस्यों अनीक शफीक सईद, मोहम्मद सादिक, अकबर इस्माइल और अंसर अहमद बादशाह शेख को गिरफ्तार कर लिया था. इन सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अरेस्ट किया गया था. आरोपियों को चेरलापल्ली सेंट्रल जेल में रखा गया है.
7 आरोपी, 3 चार्जशीट
इन बम धमाकों की जांच तेलंगाना काउंटर इंटेलीजेंस सेल कर रही थी. सेल के अधिकारियों ने तफ्तीश के दौरान इन बम धमाकों के लिए 7 लोगों को आरोपी बनाया था. इस केस में 3 अलग-अलग चार्जशीट अदालत में दायर की गई थीं. इन धमाकों की साजिश में अनीक शफीक सईद, मोहम्मद सादिक, अकबर इस्माइल और अंसर अहमद बादशाह शेख के अलावा फारुख शर्फूद्दीन और आमिर रसूल खान भी शामिल थे.
रियाज और इकबाल भटकल थे मास्टमाइंड
पुलिस और जांच एजेंसियों ने पाया कि हैदराबाद शहर को दहलाने की साजिश आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक रियाज भटकल और इकबाल भटकल ने रची थी. वो दोनों ही इन धमाकों के मास्टरमांइड थे. हालांकि रियाज भटकल, इकबाल भटकल, फारुख शर्फूद्दीन और आमिर रसूल अब भी फरार हैं.
एनआईए की स्पेशल कोर्ट में मामला
इस मामले की सुनवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की स्पेशल कोर्ट में चल रही थी. जिस पर 4 सितंबर को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी. एक बार फिर बता दें कि अगस्त 2007 में हुए इन 2 बम धमाकों में 42 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा जख्मी हुए थे.